उत्तर प्रदेश में कुल 762 नगरीय स्थानीय निकायें हैं, जिसमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद एवं 545 नगर पंचायत हैं। प्रदेश की लगभग 22 प्रतिशत से अधिक आबादी इन नगरीय स्थानीय निकायों में निवास करती है। नगरीय स्थानीय निकायों के क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या को मूलभूत नागरिक सुविधाएं यथा- स्वच्छ पेयजलापूर्ति, सड़कें/गलिया, जल निकासी, सफाई व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण, सीवरेज व्यवस्था, मार्ग प्रकाश, पार्क, स्वच्छ पर्यावरण, आदि उपलब्ध कराया जाना, इन नागर स्थानीय निकायों का कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व है।
नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतक्या है ?
नगर निगम (प्रमुख: मेयर)
नगर निगम स्थानीय निकाय व्यवस्था शहरों में होती है, जानकारी के मुताबिक इसके लिए शर्त ये होती है कि इनकी जनसंख्या कम से कम 05 लाख होनी चाहिए. नगर निगम क्षेत्रफल के लिहाज से भी काफी बडे़ इलाके को कवर करता है. हर नगर निगम में कई वार्ड होते हैं और हर वार्ड में प्रत्याशी खड़े होते हैं. उन्हें मतदाता वोटिंग के जरिए चुनता है. क्षेत्र से चुने हुए प्रत्याशी पार्षद या सभासद कहलाते हैं. ये पार्षद मिलकर नगर निगम में फैसले लेते हैं, लेकिन हर नगर निगम का प्रमुख मेयर होता है. जिसका चुनाव पार्षद नहीं करते बल्कि सीधे वोटों के जरिए जनता ही करती है. ये नगर निगम का प्रमुख होता है. हर नगर निगम कई तरह के स्थानीय टैक्स के जरिए शहर की व्यवस्थाओं और विकास के कामों को अंजाम देता है. कोई भी फैसला पार्षदों के बहुमत के आधार पर होता है, लेकिन मेयर को कुछ विशेषाधिकार होते हैं, जिसके तहत वह फैसला लेता है.
नगर पालिका परिषद/ नगर परिषद (प्रमुख: अध्यक्ष)
नगर पालिका भी स्थानीय निकाय संस्था है, जो शहर से जुड़े विकास कामों को करती है. ये नगर निगम से जनसंख्या और क्षेत्रफल में छोटा होता है. आमतौर पर छोटे शहरों और कस्बों में नगरपालिकाएं होती हैं. जैसे उदाहरण के लिए यूपी में कुल 199 नगर पालिका हैं. ये भी वार्डों में बंटी होती हैं. ये नगर निगम से छोटा और नगर पंचायत से बड़ा होता है. किसी क्षेत्र में 20 हजार से ज्यादा जनसंख्या होता है, तो वह नगर पालिका में आता है. लेकिन नगर निगम बनने के लिए उसकी जनसंख्या 1-5 लाख के बीच या उससे ज्यादा होनी चाहिए. नगर पालिका के प्रमुख को नगर पालिका अध्यक्ष कहते हैं. उसका चुनाव सीधे जनता करती है. वह प्रशासनिक अध्यक्ष होता है
नगर पंचायत (प्रमुख: चेयरमैन)
नगर पंचायत ऐसा प्रशासनिक ढ़ांचा है, जो गांव से बड़े होते हैं, लेकिन नगर के दर्जे तक नहीं पहुंची होती है. जैसे तहसील या कोई बड़ा कस्बा होता है. ये इलाके भी वार्डों में बंटे होते हैं. वहीं वार्डों से चुनकर आए प्रतिनिधि इसे चलाते हैं. इसमें एक अध्यक्ष और कुछ सदस्य शामिल होते हैं. सदस्यों एवं अध्यक्ष का चुनाव जनता करती है. नगर पंचायत का मुखिया नगर अध्यक्ष या चेयरमैन होता है. नगर पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव जनता सीधे तौर पर करती है.
क्षेत्र पंचायत सदस्य (Kshetra Panchayat Sadasya) ब्लॉक स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं जो क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक पंचायत) के सदस्य होते हैं। वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लागू करने में सहायता करते हैं. ब्लॉक कोरॉव क्षेत्र पंचायत वार्ड 4 – कोरॉव 1 – कुरहरा…
Prayagraj Nagar Nigam (Municipal Corporation) has 100 wards. The city is divided into 8 zones. The corporation is responsible for the administration and development of the city. Here’s a breakdown of the key information: Prayagraj Nagar Nigam Ward List | प्रयागराज नगर निगम Ward No. निकाय का वार्ड 1 1 – महेवा 2 2 –…
जिला पंचायत सदस्य (Zila Panchayat Sadasya) भारत में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन के लिए है. जिला पंचायत सदस्य, जिला स्तर पर चुनी गई जिला पंचायत के सदस्य होते हैं. Prayagraj Zila Panchayat Ward List | प्रयागराज जिला पंचायत वार्ड प्रयागराज जिले में कुल…
प्रयागराज जिले में, ब्लॉक प्रमुख को ब्लॉक पंचायत का अध्यक्ष कहा जाता है। यह पद पंचायती राज व्यवस्था का एक हिस्सा है, जो तहसील (ब्लॉक) स्तर पर ग्रामीण स्थानीय सरकार का प्रतिनिधित्व करता है | विकास खण्ड पद का आरक्षण उम्मीदवार पिता/पति पता उरुवा महिला आरती देवी प्रदीप कुमार औता विकास खंड उरुवा मेजा प्रयागराज…